फेसबुक पर वायरल “RILU गर्लफ्रेंड ऐप” का जाल , छत्तीसगढ़ के युवाओं को बना रहा निशाना ,डेटा चोरी और आंनलाइन फ्रॉड की आशंका

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फेसबुक पर वायरल “RILU गर्लफ्रेंड ऐप” का जाल
छत्तीसगढ़ के युवाओं को बना रहा निशाना, डेटा चोरी और ऑनलाइन फ्रॉड की आशंका


छत्तीसगढ़ | अंबिकापुर | विशेष रिपोर्ट
“अब अपने शहर में गर्लफ्रेंड बनाओ, क्योंकि अंबिकापुर की 10 हजार लड़कियां इस ऐप पर एक्टिव हैं” —
महज़ 16 सेकेंड के इस भड़काऊ और उत्तेजक विज्ञापन के ज़रिये एक संदिग्ध मोबाइल एप्लीकेशन RILU ऐप छत्तीसगढ़ के युवाओं और आम नागरिकों को अपने जाल में फंसाने की कोशिश कर रहा है।

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यह विज्ञापन इन दिनों फेसबुक जैसे बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बड़े पैमाने पर प्रसारित किया जा रहा है। विज्ञापन में अंबिकापुर, प्रतापपुर, लुंड्रा, रामानुजगंज और उदयपुर जैसे स्थानीय क्षेत्रों का नाम लेकर युवाओं में भरोसा पैदा करने की रणनीति अपनाई गई है, जिससे ग्रामीण और कस्बाई इलाकों के लोग आसानी से झांसे में आ सकें।


कैसे काम करता है RILU ऐप का जाल?
साइबर विशेषज्ञों के अनुसार, इस तरह के ऐप्स का मुख्य उद्देश्य डेटिंग या दोस्ती नहीं, बल्कि यूज़र का निजी डेटा और पैसा हासिल करना होता है।


ऐप डाउनलोड करते ही यूज़र से कई खतरनाक परमिशन मांगी जाती हैं, जैसे—
मोबाइल की कॉन्टैक्ट लिस्ट
फोटो और वीडियो गैलरी
लोकेशन एक्सेस
ओटीपी और कभी-कभी बैंकिंग से जुड़ी जानकारी
एक बार ये परमिशन मिल जाने के बाद यूज़र पूरी तरह साइबर अपराधियों के नियंत्रण में आ जाता है।


फर्जी प्रोफाइल और झूठे दावे
विज्ञापन में दावा किया जा रहा है कि “हजारों लड़कियां इस ऐप पर एक्टिव हैं”, लेकिन साइबर जानकारों का कहना है कि—
अधिकतर प्रोफाइल फर्जी या बॉट द्वारा संचालित होती हैं
प्रोफाइल फोटो अक्सर इंटरनेट से चोरी की गई होती हैं
शुरुआत में मीठी-मीठी चैटिंग कर भरोसा जीता जाता है
इसके बाद यूज़र को अलग-अलग तरीकों से फंसाया जाता है।


पैसे ऐंठने और ब्लैकमेलिंग का खतरा
कई मामलों में सामने आया है कि—
कुछ दिन चैटिंग के बाद प्रीमियम मेंबरशिप के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं
वीडियो कॉल के दौरान निजी तस्वीरें या स्क्रीन रिकॉर्डिंग कर ली जाती है
बाद में उन्हीं तस्वीरों या वीडियो के जरिए ब्लैकमेलिंग शुरू हो जाती है
पैसे न देने पर फोटो वायरल करने या परिवार को भेजने की धमकी दी जाती है
यह मानसिक, सामाजिक और आर्थिक तीनों स्तर पर युवाओं को नुकसान पहुंचाता है।


स्थानीय युवाओं को क्यों बनाया जा रहा है निशाना?
इस पूरे मामले में सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि विज्ञापन में स्थानीय शहरों और कस्बों के नाम लेकर भरोसा पैदा किया जा रहा है।


छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में साइबर जागरूकता की कमी का फायदा उठाकर ऐसे ऐप्स तेजी से युवाओं को फंसा रहे हैं।

तिल्दा टाइम्स CG न्यूज की नागरिकों से अपील
तिल्दा टाइम्स CG न्यूज  सभी नागरिकों, विशेषकर युवाओं से अपील करता है कि—
ऐसे भ्रामक और उत्तेजक सोशल मीडिया विज्ञापनों से सावधान रहें
किसी भी अनजान ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी पूरी जांच करें
मोबाइल में अनावश्यक परमिशन बिल्कुल न दें
निजी फोटो, वीडियो या जानकारी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें
किसी भी संदिग्ध गतिविधि या ठगी की स्थिति में तुरंत
स्थानीय पुलिस
साइबर सेल
या राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर संपर्क करें,


प्रशासन और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से उठते सवाल
इस मामले में कई गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं—
फेसबुक जैसे बड़े प्लेटफॉर्म पर ऐसे विज्ञापनों को अनुमति कैसे मिल रही है?
RILU ऐप के संचालक कौन हैं और किस देश या राज्य से इसे ऑपरेट किया जा रहा है?
क्या छत्तीसगढ़ साइबर पुलिस इस नेटवर्क की जांच कर रही है?
क्या ऐसे ऐप्स पर तत्काल प्रतिबंध लगाया जाएगा?


निष्कर्ष
ऑनलाइन रिश्तों और गर्लफ्रेंड-बॉयफ्रेंड के नाम पर बिछाए जा रहे ये डिजिटल जाल
न सिर्फ जेब खाली कर रहे हैं, बल्कि मानसिक तनाव और सामाजिक बदनामी का कारण भी बन रहे हैं।
सावधान रहें, सतर्क रहें —
खुद भी सुरक्षित रहें और अपने परिवार को भी जागरूक करें,

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