थाने में ब्लैकमेलिंग का खेल जोरों पर   ,कार्यवाही का डर दिखाकर  व्यापारी से वसूले 22 हजार रू.

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थाने में ब्लैकमेलिंग का खेल जोरों पर — कार्यवाही का डर दिखाकर पुलिसकर्मियों ने व्यापारी से वसूले 22 हजार, दूसरे ने खाया ज़हर

📍 बिलासपुर (छत्तीसगढ़)

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर ज़िले के सीपत थाना क्षेत्र से पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाला एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोप है कि पुलिस ने कार्यवाही का डर दिखाकर एक व्यापारी से ऑनलाइन माध्यम से 22,000 रुपए की अवैध वसूली की, जबकि एक अन्य मामले में एनटीपीसी कर्मचारी ने दबाव में आकर ज़हर खा लिया। अब यह मामला पूरे ज़िले में चर्चा का विषय बन गया है।




मामला-1: पुलिस की धमकी से परेशान होकर कर्मचारी ने खाया ज़हर

धीरेंद्र बंजारे, एनटीपीसी कर्मचारी, जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहे

रविवार, 5 अक्टूबर को उज्जवल नगर एनटीपीसी कॉलोनी निवासी धीरेंद्र बंजारे (35), जो एनटीपीसी के एचआर विभाग में कार्यरत हैं, शराब की दुकान से लौट रहे थे। इसी दौरान सीपत थाना पुलिस ने उन्हें रोककर उनकी स्कूटी जब्त कर ली और उन पर शराब पीकर वाहन चलाने का आरोप लगाया।

परिवार वालों के अनुसार, पुलिस ने 50,000 रुपए की मांग की, और रकम न देने पर सख्त कानूनी कार्रवाई की धमकी दी गई। मानसिक दबाव में आकर धीरेंद्र बंजारे ने रास्ते में ही कोई ज़हरीला पदार्थ खा लिया। उनकी पत्नी रामेश्वरी उन्हें तत्काल एनटीपीसी अस्पताल ले गईं, जहां से उन्हें अपोलो अस्पताल रेफर कर दिया गया। फिलहाल उनकी हालत गंभीर बनी हुई है।

परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने जानबूझकर उन्हें मानसिक प्रताड़ना दी, जो आत्महत्या के प्रयास की वजह बनी

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मामला-2: व्यापारी से थाना परिसर में ही वसूले गए 22,000 रुपए

ऑनलाइन सबूत के साथ व्यापारी ने की एसएसपी से शिकायत

इसी दिन एक और चौंकाने वाला मामला सामने आया जब सीपत निवासी व्यापारी अविनाश सिंह ठाकुर ने थाना प्रभारी गोपाल सतपथी और पुलिसकर्मियों पर ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली का आरोप लगाया।

क्या है मामला?

अविनाश ठाकुर 5 अक्टूबर को अपने मित्र रवि कश्यप के साथ सीपत थाना किसी व्यक्तिगत कार्य से गए थे।

दोनों बुलेट बाइक (CG 04 AX 3880) से थाना पहुंचे थे।

वहां मौजूद पुलिसकर्मियों ने धारा 185 (नशे में वाहन चलाना) के तहत कार्रवाई की धमकी दी और 50 हजार रुपए की मांग की।

डर के मारे अविनाश ठाकुर ने 22,000 रुपए ऑनलाइन ट्रांसफर कर दिए। यह रकम थाना में तैनात प्राइवेट कंप्यूटर ऑपरेटर राजेश्वर कश्यप के खाते में भेजी गई।

व्यापारी ने इस भुगतान की बैंक ट्रांजैक्शन रसीद को अपनी शिकायत के साथ वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह को सौंपा है।


फिर भी नहीं मिली राहत

रुपए देने के बावजूद, पुलिस ने व्यापारी के खिलाफ चालान किया और उनके मित्र पर भी अलग से धारा 36(च) के तहत कार्रवाई की गई।

रात करीब 10 बजे, पुलिस ने फिर से उनकी बाइक जब्त कर ली और मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई की जानकारी दी।

व्यापारी के अनुसार, यह पूरा घटनाक्रम थाना प्रभारी गोपाल सतपथी और एएसआई सहेत्तर कुर्रे की मिलीभगत से हुआ।





व्यापारी की गुहार और एसएसपी का बयान

अविनाश ठाकुर ने एसएसपी से निष्पक्ष जांच की मांग की है और चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं होती, तो वह मामला मानवाधिकार आयोग तक लेकर जाएंगे।

एसएसपी रजनेश सिंह ने क्या कहा?

> “व्यापारी अविनाश ठाकुर की शिकायत और ट्रांजैक्शन सबूत प्राप्त हुए हैं। जांच प्रारंभ कर दी गई है। दोषियों के खिलाफ सख्त विभागीय कार्रवाई की जाएगी। कोई भी दोषी नहीं बचेगा।”






स्थानीय जनता में आक्रोश और चर्चा

यह मामला सीपत थाना क्षेत्र में लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अगर ये आरोप सही साबित होते हैं, तो यह पुलिस की साख और जनता का भरोसा दोनों को गंभीर नुकसान पहुंचा सकता है। अब सबकी निगाहें एसएसपी की जांच और कार्रवाई पर टिकी हैं।




निष्कर्ष: क्या पुलिस पर से उठ रहा है भरोसा?

एक ओर जहां पुलिस की जिम्मेदारी है कि वह जनता की सुरक्षा करे, वहीं दूसरी ओर अगर वर्दीधारी ही ब्लैकमेलिंग और अवैध वसूली में लिप्त पाए जाएं, तो यह न केवल कानून व्यवस्था को प्रभावित करता है, बल्कि प्रशासन की साख पर भी सवाल खड़े करता है।

इस प्रकरण की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर सख्त कार्रवाई ही अब पुलिस की छवि को पुनर्स्थापित कर सकती है।


📍 स्थान: बिलासपुर, छत्तीसगढ़

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