सत्य के लिए जान जोखिम में:  पत्रकार प्रशान्त पाण्डेय की हत्या की साजिश का पर्दाफाश

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सत्य के लिए जान जोखिम में: पत्रकार प्रशान्त पाण्डेय की हत्या की साजिश का पर्दाफाश

भ्रष्ट अधिकारियों, दलालों और नकली पत्रकारों के गठजोड़ ने रची हत्या की साजिश, IG सरगुजा रेंज से की गई सुरक्षा की मांग

📍 अंबिकापुर/सूरजपुर | विशेष रिपोर्ट — तिल्दा टाइम्स CG न्यूज

वर्तमान समय में जब लोकतंत्र का चौथा स्तंभ पत्रकारिता भ्रष्टाचार के खिलाफ आवाज़ उठाता है, तब वही पत्रकार भ्रष्ट तंत्र के निशाने पर आ जाते हैं। सूरजपुर जिले में हिंद स्वराष्ट्र और सिंधु स्वाभिमान समाचार पत्र के संपादक प्रशान्त पाण्डेय के साथ ठीक यही हुआ। उनकी निडर रिपोर्टिंग ने भ्रष्ट अधिकारियों, जमीन दलालों और फर्जी पत्रकारों का ऐसा गठजोड़ बेनकाब किया कि इन लोगों ने उन्हें रास्ते से हटाने की साजिश रच डाली।




भ्रष्टाचार के खिलाफ छपी खबरों से हिला नेटवर्क

घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब संपादक प्रशान्त पाण्डेय ने लटोरी तहसीलदार सुरेंद्र पैंकरा के विरुद्ध खबर प्रकाशित की। आरोप था कि तहसीलदार ने बिना कलेक्टर की अनुमति और पटवारी की रिपोर्ट के फर्जी तरीके से भूमि रजिस्ट्री की। रिपोर्ट के बाद SDM शिवानी जायसवाल ने तहसीलदार को तीन कारण बताओ नोटिस जारी किया, जिसकी जांच अभी लंबित है।

जांच में हरिपुर निवासी जमीन दलाल संजय गुप्ता और उसके पुत्र हरिओम गुप्ता के नाम सामने आए। आरोप है कि इन्हीं की साठगांठ से अवैध रजिस्ट्री की गई।




प्रधानमंत्री आवास योजना में खुला बड़ा घोटाला

संपादक पाण्डेय ने भैयाथान ब्लॉक के ग्राम सिरसी में प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY-G) में गड़बड़ियों का भी खुलासा किया। रिपोर्ट के बाद जिला प्रशासन हरकत में आया और रोजगार सहायक नईम अंसारी को बर्खास्त कर दिया गया। अन्य दोषियों पर भी कार्रवाई प्रक्रिया में है।

इसी पंचायत में एक और मामला सामने आया जिसमें पीड़िता ने आरोप लगाया कि उसकी दो एकड़ भूमि फर्जी नामांतरण कर भाई के नाम कर दी गई। तहसीलदार संजय राठौर पर 5 लाख की रिश्वत लेकर फर्जी दस्तावेज बनाने का आरोप है। यह जांच भी लंबित है।




हत्या की साजिश: सुपारी देकर पत्रकार को रास्ते से हटाने की कोशिश

इन खुलासों से बौखलाए भ्रष्टाचारियों ने प्रशान्त पाण्डेय की हत्या की साजिश रच डाली। रिपोर्ट के अनुसार:

• पहली साजिश –

सिरसी में ट्रक से कुचलने की योजना थी। हरिओम गुप्ता ने दो बोलेरो और एक स्कॉर्पियो से संपादक का पीछा किया, लेकिन परिवार साथ होने के कारण योजना टाल दी गई।

• दूसरी साजिश –

फिरोज अंसारी ने अपने शूटर साले असलम को बुलाया। लेकिन प्रशान्त पाण्डेय परिवार के साथ उज्जैन दर्शन के लिए चले गए, जिससे जान बच गई।

• तीसरी कोशिश –

20 सितंबर की रात बनारस मार्ग पर बाइक से लौटते वक्त गाड़ी से टक्कर मारने की कोशिश हुई, लेकिन भीड़ के कारण हमलावर सफल नहीं हो सके।




ग्रामसभा में खुला राज: आरोपी ने सुपारी देने की बात मानी

हत्या की साजिश की परतें तब खुलीं जब हरिपुर पंचायत की ग्रामसभा में आरोपी आपस में उलझ पड़े।
संजय गुप्ता ने सबके सामने माफी मांगते हुए यह स्वीकार किया कि पत्रकार की हत्या के लिए सुपारी दी गई थी।
हालांकि उसका पुत्र हरिओम गुप्ता माफी मांगने को तैयार नहीं हुआ और पंचायत के बाहर “निर्णय” लेने की धमकी दी।




संपादक ने IG सरगुजा को सौंपी शिकायत, सुरक्षा की मांग

घटना के बाद पत्रकार प्रशान्त पाण्डेय ने सभी दस्तावेजों, वीडियो और साक्ष्यों को संकलित कर IG सरगुजा रेंज को एक विस्तृत आवेदन सौंपा। उन्होंने हत्या की साजिश में लिप्त सभी लोगों के खिलाफ कार्रवाई और परिवार को पुलिस सुरक्षा दिए जाने की मांग की है।

• संबंधित गांधीनगर थाने में भी पेनड्राइव में सभी सबूतों के साथ रिपोर्ट दर्ज की गई है।

• शिकायत की कॉपी और साक्ष्य भी जमा किए गए हैं।




पत्रकारिता की आड़ में अपराध: फर्जी पत्रकारों की भूमिका उजागर

सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि साजिश रचने वालों में कुछ लोग खुद को पत्रकार बताते हैं।
फिरोज अंसारी जैसे तथाकथित पत्रकारों ने प्रशासनिक सूचना इकट्ठा करने के बहाने संपादक को जाल में फँसाने का प्रयास किया। इससे यह साफ हो गया कि कुछ फर्जी पत्रकार अपने निहित स्वार्थों के लिए अपराधियों से गठजोड़ कर लोकतंत्र को चुनौती दे रहे हैं।




पत्रकार संगठनों में आक्रोश — सुरक्षा कानून की मांग तेज

घटना से छत्तीसगढ़ का पत्रकार समुदाय स्तब्ध है। सभी पत्रकार संगठनों ने राज्य सरकार और गृह विभाग से मांग की है कि:

✅ प्रशान्त पाण्डेय और उनके परिवार को तुरंत पुलिस सुरक्षा दी जाए
✅ सभी दोषियों पर हत्या की साजिश, सुपारी, धमकी और आपराधिक षड्यंत्र की धाराओं में FIR दर्ज की जाए
✅ पत्रकार सुरक्षा कानून को सख्ती से लागू किया जाए




मुख्य बिंदु (सारांश):

🔹 पत्रकार की हत्या की साजिश में सरकारी अधिकारियों, दलालों और फर्जी पत्रकारों की संलिप्तता
🔹 तीन बार हत्या का प्रयास — सौभाग्य से सभी विफल रहे
🔹 ग्रामसभा में खुली पोल, आरोपी ने दी माफी और किया खुलासा
🔹 IG सरगुजा को दी गई विस्तृत शिकायत, सुरक्षा की मांग
🔹 पत्रकार संगठनों का सरकार से कड़ा एक्शन लेने का आह्वान




📌 हमारा सवाल: क्या पत्रकार की कलम भ्रष्ट तंत्र से बड़ी होगी?

यह मामला केवल प्रशान्त पाण्डेय का नहीं, बल्कि हर उस पत्रकार का है जो सच्चाई के लिए लड़ रहा है। अगर समाज, प्रशासन और सरकार समय रहते कदम नहीं उठाए, तो पत्रकारिता का भविष्य खतरे में होगा।

🖋️ रिपोर्टिंग: तिल्दा टाइम्स CG न्यूज
📅 तिथि: 5 अक्टूबर 2025

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