खबर का असर:होली क्रॉस विमेन्स कॉलेज की प्राचार्या पर दर्ज हुआ FIR – पुलिस की भूमिका पर उठे सवाल

Img 20250929 Wa0040831891336113476116 1024x574



ख़बर का असर: होली क्रॉस की प्राचार्या पर दर्ज हुआ FIR – पुलिस की भूमिका पर उठे सदाल


अंबिकापुर, छत्तीसगढ़

अंबिकापुर स्थित होली क्रॉस विमेन्स कॉलेज एक बार फिर विवादों के घेरे में है। कॉलेज में आयोजित वार्षिक खेल प्रतियोगिता (Annual Sports Meet) के दौरान भारत के एक विकृत नक्शे के प्रदर्शन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। अब इस मामले में कॉलेज की प्राचार्या शांता जोसफ और फेसबुक पेज के संचालक के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की गई है। वहीं, पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठने लगे हैं।

विवादित नक्शे से शुरू हुआ मामला

मामले की शुरुआत 5-6 जनवरी 2024 को आयोजित खेल प्रतियोगिता से हुई, जिसमें एक भारत का नक्शा प्रदर्शित किया गया था। इस नक्शे में अक्साई चीन और पाकिस्तान-अधिकृत कश्मीर (पीओके) को भारत के हिस्से के रूप में नहीं दिखाया गया था। इस विवादित नक्शे की तस्वीर 19 जनवरी 2024 को कॉलेज के आधिकारिक फेसबुक पेज पर पोस्ट की गई थी, जो लगभग 19 महीने तक पब्लिक डोमेन में उपलब्ध रही।

1 सितंबर 2025 को कॉलेज द्वारा नई गतिविधियों की तस्वीरें अपलोड करने पर पुराने पोस्ट पुनः चर्चा में आ गए। इसी दौरान नक्शे की तस्वीर एक बार फिर लोगों की नज़र में आई और मामला गरमा गया।

भाजपा की शिकायत पर दर्ज हुई एफआईआर

इस मामले को लेकर भाजपा नेता कैलाश मिश्रा ने गांधी नगर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने भारतीय दंड संहिता की धारा 505(1)(B) (लोक शांति भंग करने हेतु अफवाह फैलाना) के तहत प्राचार्या शांता जोसफ और फेसबुक पेज संचालक के विरुद्ध अपराध पंजीबद्ध कर जाँच प्रारंभ कर दी है।

पुलिस पर ‘लीपापोती’ के आरोप

भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि इस गंभीर प्रकरण में सिर्फ IPC की एक धारा लगाने से पुलिस की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं। नेताओं का कहना है कि इसमें आईटी एक्ट और यहां तक कि देशद्रोह की धाराएँ भी जोड़ी जानी चाहिए थीं।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में ईसाई समुदाय से संबंधित एक प्रभावशाली विधायक के हस्तक्षेप से पुलिस पर दबाव बनाए जाने की भी जानकारी सामने आई है। इससे जाँच की निष्पक्षता पर सवाल उठने लगे हैं।

भाजपा की माँग: प्राचार्या को हटाया जाए

भाजपा नेताओं का स्पष्ट कहना है कि जब तक प्राचार्या शांता जोसफ अपने पद पर बनी रहेंगी, तब तक इस प्रकरण में निष्पक्ष जाँच संभव नहीं है। उनका कहना है कि चूंकि यह कॉलेज शासकीय अनुदान प्राप्त संस्थान है, अतः शासन को तत्काल हस्तक्षेप कर प्राचार्या को पद से हटाना चाहिए।

छात्र संगठनों का आंदोलन की चेतावनी

भाजपा से जुड़े छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया है। संगठन ने पहले ही कलेक्टर सरगुजा को ज्ञापन सौंपकर जाँच में तेजी और पारदर्शिता की माँग की है।

भाजपा नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि शासन या कॉलेज प्रबंधन प्राचार्या को तत्काल पदमुक्त नहीं करता, तो छात्र संगठन उग्र आंदोलन करेंगे। उन्होंने कहा कि यह मामला सिर्फ एक शैक्षणिक संस्थान की लापरवाही नहीं, बल्कि राष्ट्रीय एकता और अखंडता से जुड़ा विषय है।

Img 20250929 Wa00398183727245772328424 1024x589








यह प्रकरण न केवल शैक्षणिक संस्थानों में राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व के प्रश्न उठाता है, बल्कि पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर भी प्रकाश डालता है। आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि शासन इस पर क्या रुख अपनाता है—और क्या प्राचार्या के रहते इस गंभीर मामले में निष्पक्ष जाँच संभव हो पाएगी?

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *