स्कूल मे बर्बरता: छात्रा के सिर पर टीचर ने लंच टिफिन रखे बैग से किया वार,खोपड़ी फ्रैक्चर

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बच्ची के सिर का सीटी स्कैन रिपोर्ट



स्कूल में बर्बरता: छात्रा के सिर पर टीचर ने लंच टिफिन रखे बैग से किया वार, खोपड़ी में फ्रैक्चर

चित्तूर, आंध्र प्रदेश | 18 सितंबर 2025

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले से एक दिल दहला देने, घटना सामने आई है, जहां एक स्कूल टीचर ने शरारत करने पर कक्षा की छात्रा को इस कदर पीटा कि उसकी खोपड़ी में गंभीर चोट आई और फ्रैक्चर हो गया। बच्ची की हालत नाजुक बनी हुई है और उसका इलाज एक निजी अस्पताल में जारी है।

हिंदी टीचर ने टिफिन से किया हमला, स्टील के टिफिन ने पहुंचाई गहरी चोट

यह चौंकाने वाली घटना चित्तूर जिले के एक निजी स्कूल की है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली छात्रा सात्विका नागश्री पर उसकी हिंदी टीचर सलीमा बाशा ने उस समय हमला किया जब छात्रा ने क्लास में कुछ शरारत की। आरोप है कि गुस्से में आकर टीचर ने अपने हाथ में रखा बैग छात्रा के सिर पर दे मारा। बैग के अंदर स्टील का टिफिन बॉक्स था, जिसकी वजह से वार बेहद गंभीर साबित हुआ।

घटना के बाद बच्ची को तेज़ सिरदर्द, चक्कर और उल्टी की शिकायत होने लगी। पहले तो किसी को चोट की गंभीरता का अंदाजा नहीं हुआ, लेकिन हालत बिगड़ने पर जब उसे बेंगलुरु के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया और सीटी स्कैन हुआ, तब जाकर सामने आया कि छात्रा की खोपड़ी में फ्रैक्चर हुआ है।

बच्ची की मां भी उसी स्कूल में टीचर हैं, अब मां ने ही दर्ज कराई शिकायत

बताया जा रहा है कि सात्विका की मां उसी स्कूल में विज्ञान की टीचर हैं। शुरुआत में उन्होंने भी घटना को सामान्य समझा, लेकिन बेटी की हालत बिगड़ने पर उन्होंने मामले को गंभीरता से लिया। उन्होंने तुरंत पुलिस में शिकायत दर्ज कराई और बेटी का बेहतर इलाज बेंगलुरु में शुरू करवाया।

परिवार ने आरोपी हिंदी टीचर सलीमा बाशा और स्कूल प्रिंसिपल के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। इस मामले में पुंगनूर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच जारी है।


इन घटना ने राज्य भर में माता-पिता और शिक्षा जगत में चिंता की लहर पैदा कर दी है। जहां एक ओर स्कूल को बच्चों की सुरक्षा और शिक्षा का स्थान माना जाता है, वहीं दूसरी ओर ऐसी घटनाएं इस विश्वास को गहरी ठेस पहुंचा रही हैं।

प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग

स्थानीय लोगों और अभिभावकों ने राज्य सरकार और शिक्षा विभाग से मांग की है कि दोषी शिक्षकों पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाए और स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए।

इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या स्कूल वास्तव में बच्चों के लिए सुरक्षित स्थान हैं? क्या शिक्षक अपने गुस्से पर नियंत्रण नहीं रख सकते?


न्यूज़ पोर्टल: तिल्दा टाइम्स CG न्यूज


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